अमेरिका के अल्ट्रा-अमीरों ने महामारी के तीन सप्ताह में कमाए $२८२०० करोड

एलन मैकलेओड

इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज की एक नई रिपोर्ट आई है। इसमें बताया गया है कि कोरोनोवायरस महामारी के दौरान जब लाखों अमेरिकियों ने अपनी नौकरी खो दी है, तब अमेरिका के अल्ट्रा-अमीर अभिजात वर्ग के धन में केवल २३ दिनों में $२८२०० करोड की बढोतरी हुई। यह इस तथ्य के बावजूद है कि अर्थव्यवस्था इस तिमाही में ४०% तक सिकुडने की उम्मीद है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि १९८० से २०२० के बीच अमेरिका के अरबपतियों के कर दायित्वों को, उनके धन के प्रतिशत के रूप में ७९% कम पाया गया है। पिछले ३० वर्षों में, अमेरिका के अरबपतियों की संपत्ति ११००% से अधिक हो गई हैं, जबकि औसत आम आदमी कि घरेलू संपत्ति में मुश्किल से पाँच प्रतिशत की बढोतरी हुई। १९९० में, अमेरिका के अरबपति वर्ग की कुल संपत्ति $२४००० करोड थी; आज यह संख्या $२९५००० करोड है। इस प्रकार, अमेरिका के अरबपतियों ने १९८० से पहले कुल मिलाकर जितना कमाया था उससे अधिक संपत्ति पिछले तीन हफ्तों में कमाई है। नतीजन, सिर्फ तीन लोग – ऍमेझॉन के सीईओ जेफ बेज़ोस, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स और बर्कशायर हैथवे के वॉरेन बफे – निचले आधे में आने वाले सारे अमेरिकी परिवारों की कुल संपत्ती जितना धन अपने नाम कर बैठे है।

इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज की रिपोर्ट, आधुनिक दिन की तस्वीर हमारे सामने रखती है, जिसमें अल्ट्रा-अमीर देशपर कैसे कब्ज़ा कर बैठे है ये बताया है। साथ ही विधायी और कार्यकारी शक्ति पर कब्जा कर अल्ट्रा-अमीर कानून पारित करने की प्रक्रिया को भी अपने नियंत्रण में रखते हैं – ये भी इस रिपोर्ट में साफ नज़र आता है। रिपोर्ट इस बात पर भी चर्चा करती है – जिसे वो “धन रक्षा उद्योग” केहते है – जिसमें “अरबपति करों में अरबों की छूट पाने के लिए लाखों का दाना डालते हैं”। लेखाकारों, वकीलों, पैरवी करनेवाले और संपत्ति प्रबंधकों की टीमें उन्हें टॅक्स और नाम-के-दान-संस्थाओं में अपने विशाल नफे को छिपाने में मदद करते है। इसका परिणाम सामाजिक कार्यक्रमों और जीवन स्तर में गिरावट और यहां तक की आयु-संभाव्यता (एक इंसान कितने वर्ष जिंदा रेह सकता है का अंदाज़ा) में निरंतर गिरावट के रूप में सामने आया है – इतिहास में प्रमुख युद्धों या अकालों के अलावा शायद ही ऐसे भयानक परिणाम देखे गए हो। कुछ अमेरिकियों का मानना है कि उनके बच्चे उनकी तुलना में बेहतर ज़िंदगी जीएंगे। आंकड़े बताते हैं कि वे सही हैं।

बिलियनेयर्स बहुत नाटकीय रूप से कर से बचाए धन का एक बहुत छोटा हिस्सा दान करते हैं, ये सुनिश्चित करते हुए की उनके इन “दान” कार्यों का अधिकतम प्रचार हो। “प्रभावशाली समाचार संगठनों” को “बढावा” देते हुए, वे खुद के लिए सकारात्मक कवरेज सुरक्षित कर लेते हैं। मिंटप्रेस की एक दिसंबर की जांच में पाया गया कि बिल गेट्स ने The Guardian को $९० लाख, NBC Universal को $३० लाख, NPR को $४५ लाख से अधिक, Al-Jazeera को $१० लाख और BBC के मीडिया एक्शन कार्यक्रम को $४९० लाख का अनुदान दिया। बेजोस जैसे कुछ लोग सीधे तौर पर समाचार संगठनों को खरीदना ही पसंद करते हैं। अपने नए मालिकों के प्रति वफ़ादारी निभाते हुए संपादकिय लेखों का रुख बिना कोई सवाल के बदल जाता हैं।

अरबपतियों के संपत्ति में उछाल एक अभूतपूर्व आर्थिक दुर्घटना के बीच आया है; 265 लाख अमेरिकियों ने पिछले पांच हफ्तों में बेरोजगारी के लिए आवेदन किया है, और उस संख्या में खतरनाक तेज़ी से बढोतरी जारी रहने की उम्मीद है। जब रईस उनकी हवेली और नौकाओं में बंद है, ४९०-६२० लाख अमेरिकि नागरिक जिन्हें “आवश्यक श्रमिक” के रूप में नामित किया गया है, उन्हे अपनी जान को जोखिम में डालना पड रहा है समाज को चलाते रखने के लिए। इनमे से कई बेरोज़गारी भत्ता जितना भी नहीं कमा पाते है। CARES अधिनियम के मुताबिक बेरोज़गारी में $६०० की साप्ताहिक वृद्धि का लाभ मिलता है। किराने की दुकान के मज़दूर जैसे कई कम वेतन वाले कामगार पहले ही बीमार हो चुके हैं और उनकी मृत्यु हो गई है। एक 27 वर्षीय महिला श्रमिक जिन्हें कोरोना हुआ था गुज़र गई। उनकी माँ को अपनी बेटी की अंतिम तनख्वाह का चेक मिला। इसकी कीमत $२०.६४ थी।

ऍमेझॉन स्टाफ, जो सीधे बेजोस द्वारा कार्यरत किया जाता है, बहुत कम वेतन के लिए अपने जीवन को भी जोखिम में डालते हैं। उदाहरण के लिए, एरिज़ोना में सभी ऍमेझॉन कामगारो का एक तिहाई, सार्वजनिक सरकारी भोजन कार्यक्रम पर निर्भर करते है, उनकी मजदूरी इतनी कम है कि वे अपना भोजन भी खरिद नहीण सकते। COVID-19 ने अल्ट्रा-अमीरों पर और बाकी जनता पर जो असर डाला है, उसमें जमीन-आसमान का फर्क है। इसमें से हम ये निष्कर्ष पर पहुचे है कि अरबपतियों की दौलत और बाकी दुनिया की गरीबी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं: यही कारण है कि सारा समय काम करने वाले लोग अब भी घर खरिद नहीं सकते हैं, यहां तक कि अपना खाना भी खरिदने क्षमता नहीं रखते है और यही कारण है कि बेजोस जैसे लोग कई देशों की तुलना में अधिक धन को अपने कब्जे में कर बैठे हैं। जेफ बेज़ोस का अपने कर्मचारियों की भूख का समाधान है – एक दान स्थापित करना और अपने हताश श्रमिकों की मदद के लिए सार्वजनिक दान माँगना है। वाह!

बहुसंख्यक नौजवानों में से ज्यादातर नौजवान, आज के अमेरिकी सपने को प्राप्त करने से बाहर हो गए हैं। वे पहले से ही पूंजीवाद के बदले समाजवाद पसंद करते हैं, जब की वे पूंजीवाद को गेहराई में नहीं समझते। तीव्र आर्थिक पीड़ा के समय में अरबपति वर्ग कि बढती संपत्ती इन नौजवानों के स्वभाव में कोई सुधार की संभावना नहीं पेश करती है।

(एलन मैकलेओड मिंटप्रेस स्टाफ राइटर होने के साथ-साथ निष्पक्षता और रिपोर्टिंग में सटीकता के लिए एक अकादमिक और लेखक हैं।)

(यह अंग्रेजी लेख का स्वैर हिंदी अनुवाद हैं. अंग्रेजी लेख आप https://janataweekly.org/americas-super-rich-see-their-wealth-rise-by-282-billion-in-three-weeks-of-pandemic/ यहां पढ सकते हैं. )

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